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भारत गौरव सम्मान विजेता युवा उद्यमी कुलदीप शर्मा ने लिखी सफलता की नई कहानी

Kuldeep Sharma ने अपने संघर्ष, मेहनत और दूरदर्शिता के बल पर एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी लिखी है। आगरा के एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने आज डायरेक्ट सेलिंग और वेलनेस इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई है।

करीब 9 वर्ष पहले उन्होंने MLM इंडस्ट्री में अपना सफर एक साधारण शुरुआत के साथ किया था। उस समय उनके पास न कोई बड़ी पहचान थी, न आर्थिक मजबूती और न ही विशेष सपोर्ट, लेकिन उनके भीतर कुछ बड़ा करने का जुनून और लोगों की जिंदगी बदलने का सपना था।

इसी सोच और निरंतर संघर्ष का परिणाम है VitalShakti Wellness Pvt Ltd जिसका उद्देश्य केवल व्यवसाय करना नहीं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

कम्पनी का मुख्य मिशन है —

“हर घर स्वास्थ्य, हर हाथ रोजगार।”

11 मार्च 2026 को भारत सरकार में रजिस्टर्ड हुई यह कम्पनी पारदर्शिता, ईमानदारी और जनहित की भावना के साथ कार्य कर रही है। बेहद कम समय में कम्पनी ने लोगों के बीच विश्वास और लोकप्रियता हासिल की है।

उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों, सामाजिक योगदान और युवाओं को रोजगार एवं स्वास्थ्य के प्रति प्रेरित करने के प्रयासों को देखते हुए Kuldeep Sharma

को प्रतिष्ठित Bharat Gaurav Samman से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी मेहनत, नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति सकारात्मक सोच को दर्शाता है।

युवा उद्यमी कुलदीप शर्मा का कहना है कि अगर एक छोटे गांव का युवा संघर्ष करके अपनी कम्पनी स्थापित कर सकता है, तो देश का हर युवा अपने सपनों को साकार कर सकता है। मात्र 26 वर्ष की आयु में उन्होंने हजारों लोगों को प्रेरित करने का कार्य किया है।

उनका मानना है कि आने वाले समय में VitalShakti Wellness Pvt Ltd भारत के प्रमुख वेलनेस और डायरेक्ट सेलिंग ब्रांड्स में अपनी मजबूत पहचान बनाएगी।

उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा —

“जो समय के साथ बदलता है, वही इतिहास बदलता है।”

भारत गौरव सम्मान विजेता युवा उद्यमी कुलदीप शर्मा ने लिखी सफलता की नई कहानी

 

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Bharat Gaurav Samman से सम्मानित — Divya Gupta ने बढ़ाया शिक्षा जगत का गौरव

Divya Gupta को “Bharat Gaurav Samman” से किया गया सम्मानित

रेडी टू फ्लाई अबेकस क्लासेस की डायरेक्टर दिव्या गुप्ता को शिक्षा और बाल विकास के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित “भारत गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें अबेकस शिक्षा के माध्यम से बच्चों के मानसिक विकास, आत्मविश्वास और सीखने की क्षमता को मजबूत बनाने के लिए प्रदान किया गया।

दिव्या गुप्ता पिछले 12 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं और उन्होंने सैकड़ों बच्चों को अबेकस प्रशिक्षण देकर उनकी गणना गति, एकाग्रता, मेमोरी पावर और तार्किक क्षमता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी आधुनिक और प्रभावशाली शिक्षण पद्धति ने उन्हें शिक्षा जगत में एक विशेष पहचान दिलाई है।

अपने अनुभव साझा करते हुए दिव्या गुप्ता ने बताया कि उनकी सफलता का सफर संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ना जारी रखा।

“भारत गौरव सम्मान” प्राप्त करना उनके लिए गर्व और भावुकता से भरा पल है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके वर्षों की मेहनत, समर्पण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है।

दिव्या गुप्ता का उद्देश्य आगे भी बच्चों को प्रेरित करना और शिक्षा के माध्यम से उनमें आत्मविश्वास, रचनात्मकता और बेहतर सीखने की क्षमता विकसित करना है। उनकी यह उपलब्धि देशभर के शिक्षकों और महिला उद्यमियों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है।

Bharat Gaurav Samman से सम्मानित — Divya Gupta ने बढ़ाया शिक्षा जगत का गौरव

 

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राष्ट्रीय गौरव: आसनसोल के प्रसिद्ध लेखक सौरव चक्रवर्ती को ‘भारत गौरव सम्मान 2026’ से किया गया सम्मानित

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के लिए गर्व का क्षण तब आया जब प्रसिद्ध शिक्षाविद् एवं लेखक श्री सौरव चक्रवर्ती को नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रतिष्ठित “भारत गौरव सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान ‘बेस्ट ऑथर’ श्रेणी में प्रदान किया गया। इस समारोह को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, नीति आयोग तथा ISO 9001:2015 प्रमाणित एन ग्रुप का सहयोग एवं मान्यता प्राप्त थी।

श्री सौरव चक्रवर्ती को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान, समाज में जागरूकता फैलाने के प्रयासों तथा भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने हेतु “सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस” प्रदान किया गया।

विश्व स्तर पर चर्चित रचनाएँ

चयन समिति ने विशेष रूप से उनकी दो चर्चित पुस्तकों की सराहना की:

“The Impact of Sanskrit on the World and Science”

यह पुस्तक प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत भाषा के वैज्ञानिक महत्व को आधुनिक विज्ञान से जोड़ते हुए प्रस्तुत करती है।

“You Should Know Your Human Rights”

अमेरिका में लॉन्च हुई यह पुस्तक मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक सशक्तिकरण का एक प्रभावशाली माध्यम बनी है।

संघर्ष, समर्पण और सफलता की प्रेरक कहानी

यह राष्ट्रीय सम्मान वर्षों की कठिन मेहनत, गहन शोध और समाज के प्रति उनकी निष्ठा का परिणाम है। आसनसोल से कार्य करते हुए श्री चक्रवर्ती ने शिक्षक और लेखक दोनों भूमिकाओं को सफलतापूर्वक निभाया तथा अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को नई दिशा दी।

सम्मान प्राप्त करने के बाद भावुक होते हुए श्री सौरव चक्रवर्ती ने कहा:

“भारत गौरव सम्मान 2026 प्राप्त करना मेरे लिए अत्यंत गर्व और खुशी का क्षण है। यह सम्मान केवल मेरी सफलता नहीं बल्कि मेरी मेहनत, संघर्ष और उन अनगिनत रातों का परिणाम है जो मैंने अपने कार्य के लिए समर्पित कीं। मैं चाहता हूँ कि मेरा कार्य हमेशा समाज को प्रेरित करता रहे।”

उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि आलोचनाओं से घबराने के बजाय अपने लक्ष्य पर विश्वास रखें और निरंतर मेहनत करते रहें।

परिवार में खुशी का माहौल

इस उपलब्धि पर उनके परिवार में भी खुशी की लहर है। उनकी पत्नी श्रीमती श्रेया चक्रवर्ती ने कहा:

“मैंने उनकी मेहनत और समर्पण को बहुत करीब से देखा है। दिन-रात की अथक मेहनत के बाद आज उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होते देखना हमारे लिए बेहद गर्व की बात है।”

इस सम्मान के साथ श्री सौरव चक्रवर्ती ने न केवल आसनसोल बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।

राष्ट्रीय गौरव: आसनसोल के प्रसिद्ध लेखक सौरव चक्रवर्ती को ‘भारत गौरव सम्मान 2026’ से किया गया सम्मानित

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भारत गौरव सम्मान से सम्मानित हुईं लेखिका रंजीता कुमारी

(विशेष संवाददाता) : साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है कि जानी-मानी लेखिका रंजीता कुमारी को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित भारत गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके निरंतर साहित्य सृजन, लेखन के प्रति समर्पण और समाज को सकारात्मक दिशा देने के प्रयासों के लिए प्रदान किया गया।

रंजीता कुमारी एक गृहिणी होने के साथ-साथ एक सफल लेखिका भी हैं। बचपन से ही उन्हें पढ़ने का गहरा शौक था, लेकिन कम उम्र में विवाह और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उनके सपनों को विराम लग गया। दो बच्चों की परवरिश और पारिवारिक जीवन में व्यस्त रहने के बाद उन्होंने विवाह के लगभग बीस वर्षों बाद पुनः लेखन की शुरुआत की।

साल 2024 में उनकी पहली पुस्तक, एक कविता संग्रह “एक विरहिणी सी औरत” प्रकाशित हुई, जिसे पाठकों द्वारा काफी सराहना मिली। उसी वर्ष उनका कहानी संग्रह “जीवन के रंग यादों के संग” भी प्रकाशित हुआ। वर्ष 2025 में उन्होंने दो उपन्यास “एक कहानी अपनी सी” और “सलोनी” के साथ-साथ एक और कविता संग्रह “आशना” प्रकाशित किया।

वर्ष 2026 में उन्होंने बच्चों के लिए कहानी संग्रह “दादी-नानी की कहानियां: घूरता-घूरता” लिखकर बाल साहित्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी सभी पुस्तकें रविना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई हैं और इनका विमोचन दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में भव्य रूप से किया गया।

लेखन के साथ-साथ रंजीता कुमारी ने अब तक 11 पुस्तकों का संपादन भी किया है, जो उनकी साहित्यिक दक्षता और अनुभव को दर्शाता है। वर्तमान में वह ग्रामीण परिवेश पर आधारित एक नए उपन्यास पर कार्य कर रही हैं।

रंजीता कुमारी का यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को किसी कारणवश पीछे छोड़ देती हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि दृढ़ संकल्प और मेहनत हो, तो किसी भी उम्र में सफलता हासिल की जा सकती है।

उनकी इस उपलब्धि पर साहित्य प्रेमियों और क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है तथा सभी ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

भारत गौरव सम्मान से सम्मानित हुईं लेखिका रंजीता कुमारी

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ओंकार नाथ जी को अध्यात्म और कला के लिए “भारत गौरव सम्मान” से किया गया सम्मानित

इंदौर, मध्यप्रदेश: आध्यात्मिक और तांत्रिक साधना के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके राहुल सूर्यवंशी, जिन्हें उनके गुरु द्वारा दिया गया नाम ओंकार नाथ जी है, को उनकी अद्वितीय साधना, कला और आध्यात्मिक प्रतिभा के लिए प्रतिष्ठित “भारत गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया है।

पिछले लगभग 14 वर्षों से ओंकार नाथ जी नाथ सम्प्रदाय और अघोर पंथ की साधनाओं में निरंतर संलग्न हैं। इंदौर, मध्यप्रदेश के निवासी ओंकार नाथ जी ने अपने समर्पण, तप और साधना के माध्यम से इस क्षेत्र में गहन अनुभव प्राप्त किया है।

उन्होंने अघोर पंथ के सिद्धांतों, तंत्र साधना, पूजा-विधि और आध्यात्मिक क्रियाओं पर गहन अध्ययन और अभ्यास किया है। उनका मानना है कि यदि साधक को सही गुरु, उचित ज्ञान और धैर्य प्राप्त हो, तो वह जीवन में असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों को भी संभव बना सकता है।

अपने साधना काल के दौरान ओंकार नाथ जी ने श्मशान जैसे कठिन और रहस्यमय स्थानों पर रहकर भी साधनाएं की हैं। उनके अनुसार, इस दौरान उन्हें सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की ऊर्जाओं का अनुभव हुआ, जिसने उन्हें आध्यात्मिक जगत की गहराइयों को समझने में सहायता प्रदान की।

ओंकार नाथ जी ने अपने जीवन में कई शिष्यों को दीक्षा दी है, जो आज तंत्र साधना और आध्यात्मिक जागरूकता के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। उनका विश्वास है कि तंत्र, मंत्र और यंत्र के माध्यम से व्यक्ति अपनी ऊर्जा को सही दिशा देकर जीवन की समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकता है।

उनकी इसी साधना, समर्पण और असाधारण प्रतिभा को देखते हुए उन्हें “भारत गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया है, जो उनके कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति का प्रतीक है।

लगभग डेढ़ दशक के अनुभव के साथ ओंकार नाथ जी का कहना है कि आध्यात्मिक साधना के मार्ग में असीम संभावनाएं हैं, बशर्ते साधक सही मार्गदर्शन, पूर्ण विश्वास और धैर्य के साथ आगे बढ़े।

ओंकार नाथ जी को अध्यात्म और कला के लिए “भारत गौरव सम्मान” से किया गया सम्मानित

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समाजसेवा और खेल के क्षेत्र में डॉ. संजय कुमार को भारत गौरव सम्मान

नई दिल्ली। समाज के वंचित वर्गों के उत्थान और खेल के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉ. संजय कुमार को “भारत गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया है। उनके दशकों लंबे समर्पण, निस्वार्थ सेवा और खेल के ज़रिये हज़ारों युवाओं को सही दिशा देने के कार्यों को देखते हुए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।

डॉ. संजय कुमार ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए अपने जीवन को समाज और खेल सेवा के लिए समर्पित किया। उन्होंने अब तक 5,000 से अधिक बच्चों को निःशुल्क प्रशिक्षण दिया, जिनमें से 500–600 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचे। वॉलीबॉल, कबड्डी, एथलेटिक्स, बेसबॉल, मल्लखंब, बॉल बैडमिंटन सहित कई स्वदेशी खेलों में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

उन्होंने न केवल खिलाड़ियों को तैयार किया, बल्कि नशे की गिरफ्त में फँसे युवाओं को खेल के माध्यम से अनुशासित जीवन की ओर लौटाया। आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों के लिए कम लागत वाली पोषण व्यवस्था शुरू करना, दिव्यांग खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देना और बालिकाओं को खेलों में आगे बढ़ाना उनके सामाजिक सरोकारों का प्रमाण है।

उनके इन्हीं उत्कृष्ट कार्यों, सामाजिक प्रतिबद्धता और राष्ट्रहित में दिए गए योगदान को देखते हुए इनके काम को देखकर इन्हें भारत गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और सेवा का प्रतीक है, बल्कि खेल को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाने की उनकी सोच को भी मान्यता देता है।

समाजसेवा और खेल के क्षेत्र में डॉ. संजय कुमार को भारत गौरव सम्मान

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Dr. Santosh Raosaheb Chavan को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए मिला ‘भारत गौरव सम्मान’

मुंबई/चिपळूण।  मुंबई–चिपळूण क्षेत्र से जुड़े प्रख्यात समाजसेवी, खेल प्रशासक, शिक्षाविद् एवं उद्योग जगत से जुड़े डॉ. संतोष रावसाहेब चव्हाण को उनके उत्कृष्ट सामाजिक, शैक्षणिक और खेल क्षेत्र में दिए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए “भारत गौरव सम्मान” राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान नमस्कार ग्रुप एवं नमस्कार फाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा प्रदान किया गया।

डॉ. चव्हाण वर्तमान में एम्बोस्ड ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। वे वर्ष 2014–15 में आईपीएल टीम किंग्स इलेवन पंजाब के टैलेंट हंट डिपार्टमेंट के हेड रह चुके हैं तथा एक पूर्व महाराष्ट्र खिलाड़ी भी हैं। वर्तमान में वे मुंबई यूनिवर्सिटी के चीफ सिलेक्टर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

समाजसेवा के क्षेत्र में डॉ. चव्हाण का योगदान अत्यंत प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अब तक 400 से अधिक गरीब और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में सहायता की है, 200 से अधिक युवाओं को रोजगार दिलवाया है तथा 200 से अधिक युवाओं का पुलिस भर्ती में चयन उनकी रुद्र पुलिस करियर अकादमी, चिपळूण के माध्यम से हुआ है।

वे अंश चैरिटेबल ट्रस्ट, रत्नागिरी के फाउंडर प्रेसिडेंट हैं, साथ ही जागो ग्राहक जागो – कोकण विभाग के वाइस प्रेसिडेंट के रूप में भी सक्रिय हैं। खेल के क्षेत्र में उनके मार्गदर्शन में अनेक खिलाड़ी जिला, राज्य, राष्ट्रीय स्तर एवं आईपीएल तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

अपने बहुआयामी योगदान के लिए डॉ. चव्हाण को अब तक 12 राष्ट्रीय एवं 1 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

सम्मान प्राप्त करने के बाद उन्होंने कहा,

“इस प्रकार के पुरस्कार जीवन में और अधिक बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं। मैं इस सम्मान के लिए नमस्कार ग्रुप एवं नमस्कार फाउंडेशन, दिल्ली का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।”

Dr. Santosh Raosaheb Chavan को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए मिला ‘भारत गौरव सम्मान’

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मंडी, हिमाचल की बहन शैलजा जी को उनके मानवीय मूल्यों के लिए मिला ‘भारत गौरव सम्मान’

बहन शैलजा जी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान प्रत्येक व्यक्ति से अत्यंत तहज़ीब, धैर्य और संवेदनशीलता के साथ संवाद किया। उन्होंने न केवल जनसमस्याओं को गंभीरता से सुना, बल्कि जहाँ तक संभव हुआ, हर जायज़ कार्य को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ पूर्ण करवाया।

कई अवसरों पर यह भी देखने को मिला कि उन्होंने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर, अपने व्यक्तिगत संसाधनों और खर्च से भी जनहित के कार्यों को संपन्न कराया। यह उनके त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा-भाव का स्पष्ट प्रमाण है।

इनके उत्कृष्ट कार्यों, संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा के प्रति निरंतर समर्पण को देखते हुए बहन शैलजा जी को “भारत गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके कार्यों की सामाजिक स्वीकृति और उनके योगदान का गौरवपूर्ण प्रतीक है।

उनका व्यक्तित्व एक अधिकारी की सीमाओं से कहीं आगे बढ़कर इंसानियत, करुणा और संवेदनशीलता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। आमजन के प्रति उनका विनम्र व्यवहार और समस्या-समाधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें एक सच्चा जनसेवक और उत्तम इंसान बनाती है।

समाज उनके योगदान को सदैव स्मरण रखेगा। हम उनके उज्ज्वल, सशक्त और जनसेवापूर्ण भविष्य के लिए हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएँ प्रेषित करते हैं।

मंडी, हिमाचल की बहन शैलजा जी को उनके मानवीय मूल्यों के लिए मिला ‘भारत गौरव सम्मान’